पेट के रोग – Stomach Disease Home remedies in hindi

पेट के रोग

आज हर कोई पेट के रोगों से परेशान है, आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताएंगे जिन्हें अपनाकर आप पेट की किसी भी बीमारी से छुटकारा पा लेंगे।

1: पेट का दर्द

पेट के रोग

(1) वात प्रकोप के कारण पेट फूलने और अधोवायु न निकलने पर पेटका तनाव बढ़ता है, जिससे पीड़ा होती है। अजवायन और काला नमक पीसकर दोनों समान मात्रा में मिलाकर रख लें।इसे 1 चम्मच मात्रा में गर्म पानी के साथ फांकने से अधोवायु निकल जाती है, जिससे पेट का तनाव और दर्द मिट जाता है।

(2) अमृतधारा की 3-4 बूंद बताशे पर टपका कर खाने से पेट दर्द में आराम हो जाता है।

(3) अपच के कारण पेट दर्द हो रहा हो तो 10 ग्राम साबूत राई एक कप पानी के साथ बिना चबाए निगल जाएं आराम हो जाएगा।

2: पेट के कीड़े

(1) आधा चम्मच राई-चूर्ण एक कटोरी ताजा दही में मिलाकर एक सप्ताह तक सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

(2) दो टमाटर, कालीमिर्च, नमक के साथ निराहार खाने से पेट के कीड़े मर कर खत्म हो जाते हैं।

3: पेट की जलन

(1) ज्यादा चाय पीने या मिर्च-मसालों का सेवन करने से यदि पेट में जलन महसूस हो तो कचे सिंघाड़े का सेवन करें, अवश्य फायदा होगा।

4: अतिसार (दस्त)

(1) अनार की पत्तियों का रस दो चम्मच लेकर उसमें शक्कर डालकर पीने से दस्त रुक जाते हैं।

(2) एक गिलास नारियल पानी में, एकचम्मच पिसाहआजीरा मिलाकर सेवन करने से दस्त में आराम मिलता है।

(3) कच्चा पपीता काटकर पानी में उबालकर दो-तीन दिन तक खायें।

(4) जायफल को नींबू के रस में पीसकर चाटने से दस्त साफ होते है तथा पेट का अफारा मिट जाता है।

(5) एक चम्मच नींबू का रस लेकर चार छोटे चम्मच दूध में मिलाकर पीलें, आधे घण्टे में आराम होगा।

5: भूख न लगना

(1) अदरक का रस आधा चम्मच और शहद आधा चम्मच दोनों वक्त खाने के बाद लें।

(2) जीरा एक चम्मच, हींग एक चुटकी, काला नमक चौथाई चम्मच और अजवाईन एक चुटकी लेकर सबको आधा गिलास पानी में मिलाकर दिन में दो बार लें।

(3) मैथी का हरा साग पेट को ठण्डक पहुँचाने वाला एवं भूख बढ़ाने वाला होता है।

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6: भस्मक

(1) भोजन करने के थोड़ी ही देर बाद फिर से भूख लगने लगती है। इसेभस्मक रोग कहते हैं। इस रोग के रोगी को केले का गुदा 50 ग्राम और एकचम्मच शुद्ध घी दिन में दो बार सुबह-शाम खाना चाहिए।

7: अम्लपित्त (एसिडिटी)

(1) हरड़ – यह अम्लपित्त की एक श्रेष्ठ औषधि है। छोटी काली हरड़ का चूर्ण दो ग्राम लेकर उसमें दो ग्राम ही गुड़ मिलाएँ और संध्याकाल के भोजन के पश्चात खाकर ऊपर से पानी पी लें। इसके प्रयोग से एक सप्ताहके अंदर ही अम्लपित्त नष्ट हो जाएगी।

(2) दोनों समय के भोजन के पश्चात एक-एक लौंगचूसने से अम्लपित्त का दोष जाता रहता है। लौंग अमाशय की रस-क्रिया को बल प्रदान करती है। अग्लपित्त के रोगी को चाय नुकसान पहुंचाती है। अत: जब तक यह दोष दूर न हो जाए, चाय का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

(3) अम्लपित्त में नींबू बड़ा प्रभावशाली सिद्ध होता है। नींबू का रसगरम पानी में डालकर सायंकालपीने से अम्लपित्त नष्ट हो जाता है। एककप गरम पानी और एक चम्मच नींबू का रस एक-एक घंटे के अंतर सेतीन बार लें लाभ होगा।

8: अजीर्ण

(1) भूख न लगे, अजीर्ण हो, खट्टी डकार आती हों, तो एक नींबू आधा गिलास पानी में निचोड़कर शक्कर (चीनी) मिलाएँ और नित्य पिएं। एकचम्मच अदरक का रस, नींबू, सैंधा नमक एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं। अनन्नास की फांक पर नमक और काली मिर्च (पिसी हुई) डाल कर खाने से अजीर्ण दूर हो जाता है। अजीर्ण में पपीता खाना भी हितकर है।

(2) प्याज का रस एक चम्मच दो-दो घंटे के अंतर से पीने से बदहजमी ठीक हो जाती है अथवा लाल प्याज काटकर और उस पर नींबू निचोड़कर भोजन के साथ खाने से अजीर्णदूर होता है। बच्चों को अजीर्ण में प्याज के रस की पाँच बूंदें पिलाने से लाभ होता है।

9: पेचिश

(1) दही और चावल, मिश्री के साथ खाने से दस्तों में आराम मिलता है। सूखी मेथी का साग बनाकर प्रतिदिन खाएं अथवा मेथीदाना का चूर्ण तीन ग्राम दही में मिलाकर सेवन करें। आंव के रोग में लाभ होने के अतिरिक्त इससे मूत्र का अधिक आना भी बंद हो जाता है।

(2) एक सौ ग्राम सूखे धनिए में पचीस ग्राम काला नमक मिलाकर और पीसकर रख लें। भोजन के बाद आधा चम्मच की मात्रा में फांककर ऊपर से थोड़ा-सा पानी पी लें। दो-तीन दिन में ही असर देखने को मिल जाएगा।

10: पेट की गैस

(1) एक मीठा सेब लेकर उसमें 10 ग्राम लौंग चुभों दें। दस दिन बाद लौंग निकालकर तीन लौंग रोजाना खाएं। साथ में एक सेब खाएं, चावल की चीजों से परहेज करें।

11: नाभी का खिसकना

(1) जब नाभि अपने स्थान से खिसक जाती है या हट जट जाती है, तो पेट में बहुत तेज दर्द होता है, बल्कि जब तक नाभि अपने स्थान पर न आ जाए, यह दर्द बराबर बना रहता है और इस कारण दस्त लग जाते हैं। आगे को झुकने और कोई वजन आदि उठाने में भी कठिनाई होती है। नाभि को अपने स्थान पर बिठाना चाहिए। जब नाभि अपने स्थान पर आकर सैट हो जाए, तो कुछ खाना भी अवश्य चाहिए। यदि नाभि बार-बार हट जाती है, तो उसे बार-बार बिठाने का प्रयास करते नहीं रहना चाहिए, क्योंकि इससे वो झूठी पड़ जाती है। एक बार नाभि (नाप) बिठाने के पश्चात दोनों पांवों के अंगूठ में कोई मोटा काले रंग का धागा बांध लेना चाहिए, इससे नाभि का हटना बन्द हो जाता है।

(2) बीस ग्राम सौंफ को बीस ग्राम गुड़ में मिलाएं और प्रात:काल खाली पेट सेवन करें। इससे अपने स्थान से हटी हुई नाभि यथा स्थान पर आ जाएगी।

(3) नाभि पर सरसों का तेल मलने से नाभि के टलने, हटने अथवा खिसकने में लाभ होता है। रोग की तीव्रता होने पर रुई और ऊपर से कपड़े की पट्टी बांध लें। कुछ दिनों की इस प्रक्रिया से वर्षो पुराना दोष भी जाता रहता है।

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12: जी मिचलाना एवं उल्टी आना

(1) आधे नींबू के रस में आधा ग्रामजीरा और आधा ग्राम छोटी इलायची के दाने पीसकर 50 ग्राम पानी मिलाकर दो-दो घण्टे में पिलायें उल्टी बंद करने के लिये बहुत बढ़िया नुस्खा है।

(2) 10 ग्राम अदरक के रस में 10 ग्राम प्याज का रस मिलाकर पिलायें।

13: कब्ज

आज इस लेख में हमने आपको बताया, पेट के रोगों से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय, अगर आपको यह लेख पसंद आया है, तो इसे अधिक से अधिक शेयर करें धन्यवाद।

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